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Vision and Mission

दृष्टि (Parishkar Vision)

प्रतिभाओं को उत्‍कृष्टता के साथ पोषित करते हुए, उत्‍कृष्टता का स्थावैश्विक वातावरण निर्मित करते हुए उच्च शिक्षा और समाज में परिवर्तन लाना।

To nurture the talent and to transform the society, globally.

 

लक्ष्य (Parishkar Mission)

ज़रूरतमंद विश्व को सशक्त बनाने के लिए मानविकी, वैज्ञानिक और नवाचारों के साथ समग्र शिक्षण, अनुसंधान और सामाजिक सेवा के माध्यम से आजीवन सीखनेवाले व्यक्तित्व और समाज-सुधारकों के रूप में तैयार करना।

To create a community of lifelong learners and reformers through comprehensive teaching, research and social service with a humanistic, scientific and innovative temper, to empower the needy world.

उद्देश्य (Parishkar Objectives)

  • योग्यता के साथ मूल्य आधारित गुणवत्ता युक्त शिक्षा प्रदान करना।
  • विद्यार्थियों को ज्ञानवान बनाने के साथ-साथ उन्हें व्यावसायिक रूप से कुशल बनाना और उन्हें सभी प्रकार की प्रतियोगी परीक्षाओं तथा जीवन की परीक्षा के लिए तैयार करना।
  • विद्यार्थियों के व्यवहार में विशिष्ट दृष्टि, ज्ञान और कौशल को विकसित करना तथा उनकी रचनात्मक क्षमता और नेतृत्व के गुणों की खोज कर उनमें प्रबंधकीय क्षमता का विकास करना।
  • विद्यार्थियों में आशावादी दृष्टिकोण के विकास के साथ-साथ उनके स्वयं के तथा समाज के समक्ष आनेवाली चुनौतियों का सामना करने के लिए उन्हें मज़बूत-संवेदनशील व्यक्ति के रूप में तैयार करना।
  • विद्यार्थियों में ज्ञान प्राप्त करने के लिए परस्पर विचार-विमर्श और विश्लेषण करने, ज्ञान के विस्तार करते हुए उन्हें अनुसंधान और नवाचारों में समृद्ध बनाना तथा उनके अभिव्यक्ति-कौशल का विकास करना।
  • ऑनलाइन क्लासों के द्‌वारा विद्‌यार्थियों की सामर्थ्य को और मज़बूत बनाना।
  • कॉलेज की कार्यशैली को सामाजिक सेवा के रूप में विकसित करना।
  • शिक्षकों को नैदानिक दृष्टि, सैद्धांतिक ज्ञान को, अनुभवात्मक और प्रयोगात्मक प्रयासों के द्वारा शोधकर्ता, समस्या-समाधान में सक्षम बनाकर विश्वस्तर पर प्रबुद्ध सामाजिक के रूप में तैयार करना।
  • शिक्षकों तथा विद्यार्थियों में नैतिक मूल्यों का विकास, सद्भाव, न्याय, समानता, विविधता में एकता तथा अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को बढ़ावा देना।
  • उक्त लक्ष्यों को समावेशित करते हुए प्रबंध-तंत्र एवं शिक्षकों द्वारा विद्यार्थियों में नित्य नया-नया सोचने और नया-नया सीखने की प्रवृत्ति को प्रोत्साहित करते हुए सीखने की एक स्वतंत्र संस्कृति का निर्माण करना।